0 Comments

गुरु केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं जीने का ज्ञान भी सिखाते हैं -रामाकान्त राणा

दिनांक -27 जुलाई 2026 को सरस्वती विद्या मंदिर सिनीडीह की वंदना सभा में गुरु पूर्णिमा उत्सव सह महर्षि वेदव्यास जयंती का शुभारंभ प्रधानाचार्य रामाकान्त राणा,उप प्रधानाचार्य नवीन कुमार, प्रभारी -अशोक सिंह, आचार्य -अनूप पाण्डेय, अरविन्द कुमार, दीदीजी -विनिता कुमारी, कुमारी नमिता के कर कमलों से दीप प्रज्वलन एवं महर्षि वेदव्यास के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ।

इस अवसर पर बाल भारती एवं कन्या भारती के भैया -बहनों ने विद्यालय के सभी आचार्य -दीदीजी का सम्मान किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए आचार्य पंकज गुप्ता ने कहा कि आज का पावन उत्सव महर्षि वेदव्यास के जन्मदिन पर मनाया जाता है। गुरु पूजन और सम्मान की यह परंपरा पौराणिक है।बहन तृप्ति ने अंग्रेजी में एवं भैया अमृत गिरि एवं बहन आशा ने हिन्दी में महर्षि वेदव्यास के जीवन के बारे में अनमोल विचार प्रकट किए।

ककार्यक्रम का संचालन बहन साक्षी लाला ,शिवांगी पाठक एवं आचार्य धर्मेन्द्र तिवारी ने किया। विद्यालय के भैया -बहनों द्वारा गुरु के सम्मान में सुमधुर गीत प्रस्तुत किया गया।अंग्रेजी आचार्य रामाकांत मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि महर्षि वेदव्यास एक सामान्य ऋषि नहीं अपितु एक युगद्रष्टा थे।दीदी -सीमा सहाय ने अपने वक्तव्य में कहा कि गुरु ज्ञान परंपरा का संवर्धन हमारा परम कर्तव्य है।

प्रधानाचार्य रामाकान्त राणा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि गुरु केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं बल्कि जीने का व्यवहारिक ज्ञान भी देते हैं। महर्षि वेदव्यास एक ऐसे गुरु थे, जिन्होंने ब्रह्मा के मुख से निकली वेदवाणी को जनवाणी बनाने का कार्य किया। श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में जीने का शास्त्र दिया। गुरु का सम्मान और आज्ञापालन कर ही हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।

इसी अवसर पर विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति द्वारा आचार्य -दीदीजी का सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें विद्यालय के कोषाध्यक्ष विनय पांडे एवं प्रबंधकारिणी समिति के सदस्य उत्तम गयाली का सानिध्य प्राप्त हुआ। साथ ही, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिनीडीह मंडल (महुदा खंड) द्वारा गुरु दक्षिणा महोत्सव भी मनाया गया जिसमें धनबाद विभाग के सह बौद्धिक प्रमुख डॉक्टर सुनील कुमार जी का उद्बोधन सभी आचार्य -दीदीजी एवं कर्मचारी बंधु – भगनी को प्राप्त हुआ।

Share:

Categories: