दिनांक 31 जुलाई 2025 को सरस्वती विद्या मंदिर सिनीडीह में श्रीरामचरितमानस के कवि संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थी विद्यालय के अभिभाविका श्रीमती संध्या देवी। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती संध्या देवी,प्रधानाचार्य श्री राकेश सिन्हा एवं समिति सदस्य के कर कमलों से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच संचालन भैया -नमन एवं अंशुमान ने किया।
अतिथि परिचय आचार्या श्रीमती सुतपा दास ने कराया।इस अवसर पर विद्या विकास समिति, झारखंड द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताएं संपन्न हुई। कक्षा -द्वितीय, तृतीय में सुलेख , कक्षा -चतुर्थ व पंचम में चित्रकला एवं कक्षा -षष्ठ से द्वादश तक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन आचार्या डाक्टर निशा तिवारी, श्रीमती कुमारी नमिता एवं आचार्य श्री अजय पाण्डेय की उपस्थिति में हुआ। इसमें विभिन्न कक्षाओं से 84 भैया -बहन सम्मिलित हुए।
चयनित प्रतिभागियों को प्रांत द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। कार्यक्रम की प्रस्तावना को प्रस्तुत करते हुए आचार्या श्रीमती कुमारी नमिता ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास का जीवन प्रेरणा से भरा हुआ है।इनकी रचनाओं में श्रीरामचरितमानस धर्मग्रंथ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
रंगमंचीय कार्यक्रम में बहन -अनुष्का,रीशिका, तृप्ति,अवनी ने हिंदी में गोस्वामी जी के जीवन पर अपना भाषण प्रस्तुत किया।बहन रानी एवं सुलेखा ने अंग्रेजी में अपना विचार व्यक्त किया। भैया-अंशुमान एवं ज्योति प्रिया ने रामायण की चौपाइयां सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्य अतिथि श्रीमती संध्या देवी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन से हमें सीख लेनी चाहिए कि विषम परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं माननी चाहिए। प्रधानाचार्य श्री राकेश सिन्हा ने कहा कि साहित्य जगत में काव्य के क्षेत्र में गोस्वामी तुलसीदास संत शिरोमणि के रूप में वंदनीय और पूजनीय हैं।
अपने कष्टमयी जीवन में भी महानतम कार्य किए जो प्रेरणादायक है।प्रांत द्वारा आयोजित प्रतियोगिता भैया -बहनों के अंदर छिपी साहित्य सृजन की प्रतिभा को जागृत करता है।समिति सदस्य उत्तम गयाली ने कहा कि आज गोस्वामी जी का श्रीरामचरितमानस नहीं होता तो हम प्रभु राम के चरित्र को नहीं जान पाते । धन्यवाद ज्ञापन आचार्य श्री रामाकांत मिश्रा ने किया।मौके पर सभी आचार्य एवं दीदी जी की उपस्थिति रही।




